ख्वाहिशें
☆☆ ख्वाहिशें ☆☆
ख्वाहिशें ऐसी चीज होती है जिसका कोई अंत नहीं होता। हम सभी की ढेर सारी ख्वाहिशें होती हैं । एक के पूरी होते हीं अगली ख्वाइश जन्म ले लेती है ।
एक दिन एक राजा ने अपनी सारी प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि मैं आप सब का राजा हूं तो मेरी सारी चीजें भी आप सभी की हैं। कल महल के द्वार सुबह 8:00 बजे खोल दिए जाएंगे और सारी प्रजा महल में आमंत्रित है । जो जिस चीज को सबसे पहले हाथ लगा देगा वह चीज उसकी हो जाएगी। यह एलान सुनते ही सारी प्रजा यह सोच में पड़ गई कि मैं क्या लूं ? और एक ही चीज लेने की अनुमति थी । सब सोच रहे थे कि कहीं जो मुझे चाहिए वो किसी दूसरे ने हाथ लगा दिया तो ? शायद ही उस रात प्रजा में से कोई सोया होगा !
जैसे ही महल के द्वार खोले गए वैसे ही सारी प्रजा में अपनी पसंदीदा चीजों को छूने की होड़ सी मच गई । कोई चाहता था कि घोड़े उसके हो जाए क्योंकि वह घोड़ों का शौकीन था। कोई चाहता था कि हाथी उसके हो जाए। तो कोई चाहता था कि उसे दुधारू गाय मिल जाए , तो कोई चाहता था कि महल में लगे आलीशान सिहांसन उसे मिल जाए, कोई धन , कोई जेवरात , किसी को राजा के कपड़ों पर तो किसी को रानी के गहनों पर नजर थी । हर किसी को किसी न किसी चीज पर नजर थी । हर किसी को लग रहा था कि उनके पसंद की चीज को कोई उनसे पहले जाकर न छू ले । तो एक अफरा-तफरी सी मची थी ।
राजा अपने सिंहासन पर बैठा यह सब कुछ देख कर मंद-मंद मुस्कुरा रहा था; कि किस तरह यहां भागदौड़ चल रही है। इतने में इन सबके बीच एक छोटी सी बच्ची धीरे-धीरे अपने डगमगाए कदमों से राजा के तरफ आ रही थी । राजा ने उसे देखा, थोड़ी हैरानी हुई मगर सोचा कि छोटी बच्ची है हो सकता है मुझसे कुछ पूछने आ रही हो ; लेकिन उस लड़की ने तो कुछ अलग हीं किया ; आई और आकर सीधे राजा की गोद में बैठ गई । उसने राजा को ही अपना बना लिया । तो जब राजा उसका हो गया तो राजा की सभी चीजें भी उस छोटी सी बच्ची की हो गई । बाकी सभी लोग हैरान हो गए कि उन्होंने इस बारे में क्यों नहीं सोचा ।
जो गलती बाकी लोगों ने की वही गलती हम और आप रोज कर रहे होते है । ईश्वर से चाहना और इश्वर को चाहना इन दोनों चीजों में बहुत फर्क होता है। ईश्वर की बनाई इस दुनिया में बहुत सी सांसारिक वस्तुएं हैं जिन्हें हम चाहते हैं लेकिन इन चीजों को बनाने वाला जो ईश्वर है उससे चाह रखना भूल जाते हैं और उससे दूर हो जाते हैं। यह भूल जाते हैं कि अगर आप उसके करीब होंगे तो सारे सुख जिसके लिए आप भागदौड़ कर रहे हैं वह सब आपको मिल जाएंगे ।
तो कुछ देर खुद को ईश्वर के सानिध्य में महसूस करने की
कोशिश कीजिए तो आप यह फर्क जरूर महसूस कर पाएंगे कि ईश्वर से चाहना और इश्वर को चाहना दोनो कितना अलग
है।
ख्वाहिशें ऐसी चीज होती है जिसका कोई अंत नहीं होता। हम सभी की ढेर सारी ख्वाहिशें होती हैं । एक के पूरी होते हीं अगली ख्वाइश जन्म ले लेती है ।
एक दिन एक राजा ने अपनी सारी प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि मैं आप सब का राजा हूं तो मेरी सारी चीजें भी आप सभी की हैं। कल महल के द्वार सुबह 8:00 बजे खोल दिए जाएंगे और सारी प्रजा महल में आमंत्रित है । जो जिस चीज को सबसे पहले हाथ लगा देगा वह चीज उसकी हो जाएगी। यह एलान सुनते ही सारी प्रजा यह सोच में पड़ गई कि मैं क्या लूं ? और एक ही चीज लेने की अनुमति थी । सब सोच रहे थे कि कहीं जो मुझे चाहिए वो किसी दूसरे ने हाथ लगा दिया तो ? शायद ही उस रात प्रजा में से कोई सोया होगा !
जैसे ही महल के द्वार खोले गए वैसे ही सारी प्रजा में अपनी पसंदीदा चीजों को छूने की होड़ सी मच गई । कोई चाहता था कि घोड़े उसके हो जाए क्योंकि वह घोड़ों का शौकीन था। कोई चाहता था कि हाथी उसके हो जाए। तो कोई चाहता था कि उसे दुधारू गाय मिल जाए , तो कोई चाहता था कि महल में लगे आलीशान सिहांसन उसे मिल जाए, कोई धन , कोई जेवरात , किसी को राजा के कपड़ों पर तो किसी को रानी के गहनों पर नजर थी । हर किसी को किसी न किसी चीज पर नजर थी । हर किसी को लग रहा था कि उनके पसंद की चीज को कोई उनसे पहले जाकर न छू ले । तो एक अफरा-तफरी सी मची थी ।
राजा अपने सिंहासन पर बैठा यह सब कुछ देख कर मंद-मंद मुस्कुरा रहा था; कि किस तरह यहां भागदौड़ चल रही है। इतने में इन सबके बीच एक छोटी सी बच्ची धीरे-धीरे अपने डगमगाए कदमों से राजा के तरफ आ रही थी । राजा ने उसे देखा, थोड़ी हैरानी हुई मगर सोचा कि छोटी बच्ची है हो सकता है मुझसे कुछ पूछने आ रही हो ; लेकिन उस लड़की ने तो कुछ अलग हीं किया ; आई और आकर सीधे राजा की गोद में बैठ गई । उसने राजा को ही अपना बना लिया । तो जब राजा उसका हो गया तो राजा की सभी चीजें भी उस छोटी सी बच्ची की हो गई । बाकी सभी लोग हैरान हो गए कि उन्होंने इस बारे में क्यों नहीं सोचा ।
जो गलती बाकी लोगों ने की वही गलती हम और आप रोज कर रहे होते है । ईश्वर से चाहना और इश्वर को चाहना इन दोनों चीजों में बहुत फर्क होता है। ईश्वर की बनाई इस दुनिया में बहुत सी सांसारिक वस्तुएं हैं जिन्हें हम चाहते हैं लेकिन इन चीजों को बनाने वाला जो ईश्वर है उससे चाह रखना भूल जाते हैं और उससे दूर हो जाते हैं। यह भूल जाते हैं कि अगर आप उसके करीब होंगे तो सारे सुख जिसके लिए आप भागदौड़ कर रहे हैं वह सब आपको मिल जाएंगे ।
तो कुछ देर खुद को ईश्वर के सानिध्य में महसूस करने की
कोशिश कीजिए तो आप यह फर्क जरूर महसूस कर पाएंगे कि ईश्वर से चाहना और इश्वर को चाहना दोनो कितना अलग
है।


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