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मेरे छात्र, मेरा गर्व: यादों और उपलब्धियों की कहानी

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  प्रिय बच्चों, आप सभी के साथ बिताया गया हर एक पल हमारे लिए एक अनमोल अनुभव रहा है। इन वर्षों में हमने न केवल आपको पढ़ाया, बल्कि आपसे भी बहुत कुछ सीखा। आपकी मुस्कान, आपकी शरारतें, आपकी जिज्ञासा और आपकी मेहनत – ये सब यादें हमेशा हमारे दिल में जीवित रहेंगी। मैं विशेष रूप से आशुतोष का उल्लेख करना चाहूँगा, जिसने अपनी मेहनत और ज्ञान के बल पर निबंध प्रतियोगिता से लेकर गणित ओलंपियाड में विद्यालय का नाम राज्य स्तर तक पहुँचाया। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। इसी तरह हमारे बीच कई प्रतिभाशाली बच्चे हैं, जो आगे चलकर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपना, अपने माता-पिता और अपने गुरुओं का नाम रोशन करेंगे। कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें हम कभी भूल नहीं सकते। अगर मैं प्रिया, पम्मी और निधि का नाम न लूँ, तो यह बिल्कुल गलत होगा। ये बेटियां न केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट हैं, बल्कि कला, संस्कृति और तकनीक—विशेष रूप से कंप्यूटर—में भी इनकी गहरी समझ है। इनके अंदर सीखने की अद्भुत लगन है। पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय के कार्यों में इन्होंने हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ दिया। अभी हाल ही में इन तीनों ने कक्षा 1...

दोस्ती का मतलब

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☘ दोस्ती का मतलब ☘ बहुत समय पहले की बात है , दो दोस्त बीहड़ इलाकों से होकर शहर जा रहे थे . गर्मी बहुत अधिक होने के कारण वो बीच -बीच में रुकते और आराम करते . उन्होंने अपने साथ खाने-पीने की भी कुछ चीजें रखी हुई थीं . जब दोपहर में उन्हें भूख लगी तो दोनों ने एक जगह बैठकर खाने का विचार किया . खाना खाते – खाते दोनों में किसी बात को लेकर बहस छिड गयी ..और धीरे -धीरे बात इतनी बढ़ गयी कि एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया .पर थप्पड़ खाने के बाद भी दूसरा दोस्त चुप रहा और कोई विरोध नहीं किया ….बस उसने पेड़ की एक टहनी उठाई और उससे मिटटी पर लिख दिया “ आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा ” थोड़ी देर बाद उन्होंने पुनः यात्रा शुरू की , मन मुटाव होने के कारण वो बिना एक -दूसरे से बात किये आगे बढ़ते जा रहे थे कि तभी थप्पड़ खाए दोस्त के चीखने की आवाज़ आई , वह गलती से दलदल में फँस गया था …दूसरे दोस्त ने तेजी दिखाते हुए उसकी मदद की और उसे दलदल से निकाल दिया . इस बार भी वह दोस्त कुछ नहीं बोला उसने बस एक नुकीला पत्थर उठाया और एक विशाल पेड़ के तने पर लिखने लगा ” आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान ब...

भोलापन सही है या गलत

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☘भोलापन सही है या गलत ☘ अक्सर समाज में आप यह सुनते होंगे, वह बहुत भोला है ! इतने भोलेपन के कारण ही तो लोग उसे ठगते हैं । भोले लोगों को अक्सर समाज महामूर्ख समझता है । भोलापन, सरलता और सीधा होना आजकल मूर्ख होने की निशानी बन गया है । जो सरल नहीं होता लोग उससे बचकर रहने की सलाह और भोले लोगों को दुनियादारी या चालाक बनने की सीख देते रहते हैं। क्या भोला होना इतना बेकार होता है ? क्या भोला होना मूर्खता है ? क्या भोलेनाथ शंकर नहीं जानते की चतुराई क्या होती है ? क्या विश्वगुरु शिव समझदार नहीं है ? भोलापन अर्थात सब कुछ भूल जाना; जो भूलेगा वही भोला होगा और भूलने के लिए मन का सरल और निर्मल इन दोनों का होना आवश्यक है। जो सरल नहीं होगा वह भोला नहीं हो सकता । जिसके मन में हर पल लोभ, लाभ का गणित चलता रहेगा वह भोला हो ही नहीं सकता। भोला वही हो सकता है जो मन का भी भूला रहे और सम्मान का भी भूला रहे । यानी समाज में मान मिले या सम्मान व्यक्ति उसे भुलाकर अपना काम करता रहे । भोला व्यक्ति बताता है कि बिना हिसाब-किताब के भी जीवन जिया जा सकता है । इसका मतलब यह नहीं है कि भोला व्यक्ति मूर्ख है । अग...

रोटी और संबंध

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🌺 रोटी और संबंध 🌺                     इसे ⬆️⬆️ कौन नहीं पहचानता ? यह है रोटी ; यही तो वह कारण है; जिसके लिए हम और आप दिन रात परिश्रम करते हैं । वैसे देखा जाए यह रोटी यूं ही मिल जाती तो हम और आप कोई काम ही नहीं करते। किसी तरह का कष्ट नहीं करते, जीवन में परिश्रम नहीं करते।   वैसे एक बात तो है रोटी केवल भूख ही नहीं मिटाती बल्कि जीवन की एक बड़ी सीख दे जाती है। अब तनिक सोचिए कि रोटी आपको स्वादिष्ट तभी लगेगी या रोटी हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छी तभी होगी जब यह दोनों तरफ से ठीक तरह से सेकी जाए।   हमारे जीवन में संबंध भी कुछ इसी प्रकार होते हैं; यदि दोनों ओर से अच्छी तरह से निभाएं जाए तभी आपको आनंद देती है। इसलिए केवल पाने के लिए आतुर ना रहे लौटाने में भी विश्वास रखें ; क्योंकि एक संबंध में जब दोनों ओर से प्रेम होगा, दोनों तरफ से करुणा होगी , कुछ करने की चाह होगी तभी वह संबंध आपको जीवन में आनंद देगा। तो जब-जब रोटी खाएं तो यह याद रखें कि आपको अपने संबंधों को भी इसी प्रकार मधुर बनाना है।

ख्वाहिशें

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☆☆ ख्वाहिशें ☆☆     ख्वाहिशें ऐसी चीज होती है जिसका कोई अंत नहीं होता। हम सभी की ढेर सारी ख्वाहिशें होती हैं । एक के  पूरी होते हीं अगली ख्वाइश जन्म ले लेती है ।      एक दिन एक राजा ने अपनी सारी प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि मैं आप सब का राजा हूं तो मेरी सारी चीजें भी आप सभी की हैं। कल महल के द्वार सुबह 8:00 बजे खोल दिए जाएंगे और सारी प्रजा महल में आमंत्रित है । जो जिस चीज को सबसे पहले हाथ लगा देगा वह चीज उसकी हो जाएगी। यह एलान सुनते ही सारी प्रजा यह सोच में पड़ गई  कि मैं क्या लूं ? और एक ही चीज लेने की अनुमति थी । सब सोच रहे थे कि कहीं जो मुझे चाहिए वो किसी दूसरे ने हाथ लगा दिया तो ? शायद ही उस रात प्रजा में से कोई सोया होगा !     जैसे ही महल के द्वार खोले गए वैसे ही सारी प्रजा में अपनी पसंदीदा चीजों को  छूने की होड़ सी मच गई । कोई चाहता था कि घोड़े उसके हो जाए क्योंकि वह घोड़ों का शौकीन था। कोई चाहता था कि हाथी उसके हो जाए। तो कोई चाहता था कि उसे दुधारू गाय मिल जाए , तो कोई चाहता था कि महल में लगे आलीशान सिहांसन उसे मिल जाए,...

थोड़ी दुरी

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➤ थोड़ी  दुरी  यह कहानी है दो बच्चों की जो कि एक गांव में रहते थे। एक बच्चे का नाम अंश जो की 6 साल का था और एक बच्चे का नाम ओम जो की 10 साल का था । दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। दोनों हमेशा साथ-साथ रहते , साथ-साथ खेलते, साथ-साथ खाते - पीते। एक दिन वह दोनों पतंग उड़ाते - उड़ाते गांव से थोड़ा दूर निकल गए और खेलते - खेलते उन दोनों में जो बड़ा बच्चा ओम जो कि 10 साल का था वह कुएं में गिर गया। और जोर-जोर से चीखने चिल्लाने लगा । उसे तैरना भी भी नहीं आता था। अब जो छोटा बच्चा अंश जो की 6 साल का था उसने अपने आसपास देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया जिसको वो बुला सके मदद के लिए; और तब उसकी नजर एक बाल्टी पर पडी जो एक रस्सी से बंधी थी। उसने बिना एक पल गवांए उस बाल्टी को कुएं में फेंक दिया और अपने दोस्त को बोला इसे पकड़ लो । उसके दोस्त ने बाल्टी को पकड़ लिया और अंश अपनी पूरी ताकत लगा कर उसे खींचने लगा। खींचता रहा , खींचता रहा उसने अपनी पूरी जान लगा दी। और तब तक खींचा जब तक उसने अपने दोस्त की जान ना बचा ली । आखिरकार उस छोटे से 6 साल के बच्चे अंश ने अपने दोस्त ओम की जान बचा ली, दो...

! शायद !

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किसी  से अपने मन के सुख - दुख बांटना सही है या गलत ? कभी-कभी लगता है कि हम बहुत कमजोर हो जाते हैं तो अपनी भावनाएं , अपने भीतर छुपी बातें , अपनी खुशी या अपनी परेशानी किसी दूसरे इंसान से शेयर करते हैं ; लेकिन क्या वास्तव में हम कमजोर होते हैं? या यह हमारा उस दूसरे इंसान पर विश्वास होता है, जो हम उससे अपनी भावनाएं शेयर कर देते हैं ।  यह सवाल मेरे मन में उलझ गया है । आज के दौर में क्या कोई साफ दिल का इंसान मिलना मुमकिन है? समझ नहीं आता कि बात हंसने की है या परेशान होने की। आज के दौर में जिंदगी इतनी उलझी हुई है कि अब सुलझ नहीं सकती।  तो क्यों न इस उलझन के उलझे हुए होने का भी मजा लिया जाए। उसे यूं ही छोड़ दिया जाए। कुछ बातें आधी अधूरी ही मजा देती हैं। बिजी रहता है मन , एक्साइटमेंट बना रहता है ; कि आगे क्या होता है? या क्या होने वाला था? क्या हो सकता था? अगर लाइफ में कुछ पुरा नहीं हो रहा तो ना होने दो। जो अधुरे पन्ने हैं जिंदगी की किताब के उन्हें पूरे करने की कोशिश ही मत करो । शायद जिंदगी में कोई एक्साइटमेंट आ जाए ? !शायद!