भोलापन सही है या गलत
☘भोलापन सही है या गलत ☘
अक्सर समाज में आप यह सुनते होंगे, वह बहुत भोला है ! इतने भोलेपन के कारण ही तो लोग उसे ठगते हैं । भोले लोगों को अक्सर समाज महामूर्ख समझता है । भोलापन, सरलता और सीधा होना आजकल मूर्ख होने की निशानी बन गया है । जो सरल नहीं होता लोग उससे बचकर रहने की सलाह और भोले लोगों को दुनियादारी या चालाक बनने की सीख देते रहते हैं।
क्या भोला होना इतना बेकार होता है ? क्या भोला होना मूर्खता है ? क्या भोलेनाथ शंकर नहीं जानते की चतुराई क्या होती है ? क्या विश्वगुरु शिव समझदार नहीं है ?
भोलापन अर्थात सब कुछ भूल जाना; जो भूलेगा वही भोला होगा और भूलने के लिए मन का सरल और निर्मल इन दोनों का होना आवश्यक है। जो सरल नहीं होगा वह भोला नहीं हो सकता । जिसके मन में हर पल लोभ, लाभ का गणित चलता रहेगा वह भोला हो ही नहीं सकता। भोला वही हो सकता है जो मन का भी भूला रहे और सम्मान का भी भूला रहे । यानी समाज में मान मिले या सम्मान व्यक्ति उसे भुलाकर अपना काम करता रहे । भोला व्यक्ति बताता है कि बिना हिसाब-किताब के भी जीवन जिया जा सकता है । इसका मतलब यह नहीं है कि भोला व्यक्ति मूर्ख है ।
अगर हम महादेव के जीवन को भोलेपन का उदाहरण मानते हैं तो हमें यह बात सीखने को मिलती है कि वह अपने किए के बदले किसी प्रकार की चाह नहीं रखते। समाज में ऐसे लोगों के प्रति दो तरह की भावना होती है एक वह लोग होते हैं जो भोले लोगों का लाभ उठाते हैं और दूसरे वो जो भोले लोगों को भगवान बना देते हैं । सच्चा भोला वह है जो भगवान कहे जाने से ना आनंदित हो और ना ठगे जाने से व्यथित।
अक्सर समाज में आप यह सुनते होंगे, वह बहुत भोला है ! इतने भोलेपन के कारण ही तो लोग उसे ठगते हैं । भोले लोगों को अक्सर समाज महामूर्ख समझता है । भोलापन, सरलता और सीधा होना आजकल मूर्ख होने की निशानी बन गया है । जो सरल नहीं होता लोग उससे बचकर रहने की सलाह और भोले लोगों को दुनियादारी या चालाक बनने की सीख देते रहते हैं।
क्या भोला होना इतना बेकार होता है ? क्या भोला होना मूर्खता है ? क्या भोलेनाथ शंकर नहीं जानते की चतुराई क्या होती है ? क्या विश्वगुरु शिव समझदार नहीं है ?
भोलापन अर्थात सब कुछ भूल जाना; जो भूलेगा वही भोला होगा और भूलने के लिए मन का सरल और निर्मल इन दोनों का होना आवश्यक है। जो सरल नहीं होगा वह भोला नहीं हो सकता । जिसके मन में हर पल लोभ, लाभ का गणित चलता रहेगा वह भोला हो ही नहीं सकता। भोला वही हो सकता है जो मन का भी भूला रहे और सम्मान का भी भूला रहे । यानी समाज में मान मिले या सम्मान व्यक्ति उसे भुलाकर अपना काम करता रहे । भोला व्यक्ति बताता है कि बिना हिसाब-किताब के भी जीवन जिया जा सकता है । इसका मतलब यह नहीं है कि भोला व्यक्ति मूर्ख है ।
अगर हम महादेव के जीवन को भोलेपन का उदाहरण मानते हैं तो हमें यह बात सीखने को मिलती है कि वह अपने किए के बदले किसी प्रकार की चाह नहीं रखते। समाज में ऐसे लोगों के प्रति दो तरह की भावना होती है एक वह लोग होते हैं जो भोले लोगों का लाभ उठाते हैं और दूसरे वो जो भोले लोगों को भगवान बना देते हैं । सच्चा भोला वह है जो भगवान कहे जाने से ना आनंदित हो और ना ठगे जाने से व्यथित।

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