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रोटी और संबंध

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🌺 रोटी और संबंध 🌺                     इसे ⬆️⬆️ कौन नहीं पहचानता ? यह है रोटी ; यही तो वह कारण है; जिसके लिए हम और आप दिन रात परिश्रम करते हैं । वैसे देखा जाए यह रोटी यूं ही मिल जाती तो हम और आप कोई काम ही नहीं करते। किसी तरह का कष्ट नहीं करते, जीवन में परिश्रम नहीं करते।   वैसे एक बात तो है रोटी केवल भूख ही नहीं मिटाती बल्कि जीवन की एक बड़ी सीख दे जाती है। अब तनिक सोचिए कि रोटी आपको स्वादिष्ट तभी लगेगी या रोटी हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छी तभी होगी जब यह दोनों तरफ से ठीक तरह से सेकी जाए।   हमारे जीवन में संबंध भी कुछ इसी प्रकार होते हैं; यदि दोनों ओर से अच्छी तरह से निभाएं जाए तभी आपको आनंद देती है। इसलिए केवल पाने के लिए आतुर ना रहे लौटाने में भी विश्वास रखें ; क्योंकि एक संबंध में जब दोनों ओर से प्रेम होगा, दोनों तरफ से करुणा होगी , कुछ करने की चाह होगी तभी वह संबंध आपको जीवन में आनंद देगा। तो जब-जब रोटी खाएं तो यह याद रखें कि आपको अपने संबंधों को भी इसी प्रकार मधुर बनाना है।

ख्वाहिशें

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☆☆ ख्वाहिशें ☆☆     ख्वाहिशें ऐसी चीज होती है जिसका कोई अंत नहीं होता। हम सभी की ढेर सारी ख्वाहिशें होती हैं । एक के  पूरी होते हीं अगली ख्वाइश जन्म ले लेती है ।      एक दिन एक राजा ने अपनी सारी प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि मैं आप सब का राजा हूं तो मेरी सारी चीजें भी आप सभी की हैं। कल महल के द्वार सुबह 8:00 बजे खोल दिए जाएंगे और सारी प्रजा महल में आमंत्रित है । जो जिस चीज को सबसे पहले हाथ लगा देगा वह चीज उसकी हो जाएगी। यह एलान सुनते ही सारी प्रजा यह सोच में पड़ गई  कि मैं क्या लूं ? और एक ही चीज लेने की अनुमति थी । सब सोच रहे थे कि कहीं जो मुझे चाहिए वो किसी दूसरे ने हाथ लगा दिया तो ? शायद ही उस रात प्रजा में से कोई सोया होगा !     जैसे ही महल के द्वार खोले गए वैसे ही सारी प्रजा में अपनी पसंदीदा चीजों को  छूने की होड़ सी मच गई । कोई चाहता था कि घोड़े उसके हो जाए क्योंकि वह घोड़ों का शौकीन था। कोई चाहता था कि हाथी उसके हो जाए। तो कोई चाहता था कि उसे दुधारू गाय मिल जाए , तो कोई चाहता था कि महल में लगे आलीशान सिहांसन उसे मिल जाए,...

थोड़ी दुरी

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➤ थोड़ी  दुरी  यह कहानी है दो बच्चों की जो कि एक गांव में रहते थे। एक बच्चे का नाम अंश जो की 6 साल का था और एक बच्चे का नाम ओम जो की 10 साल का था । दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। दोनों हमेशा साथ-साथ रहते , साथ-साथ खेलते, साथ-साथ खाते - पीते। एक दिन वह दोनों पतंग उड़ाते - उड़ाते गांव से थोड़ा दूर निकल गए और खेलते - खेलते उन दोनों में जो बड़ा बच्चा ओम जो कि 10 साल का था वह कुएं में गिर गया। और जोर-जोर से चीखने चिल्लाने लगा । उसे तैरना भी भी नहीं आता था। अब जो छोटा बच्चा अंश जो की 6 साल का था उसने अपने आसपास देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया जिसको वो बुला सके मदद के लिए; और तब उसकी नजर एक बाल्टी पर पडी जो एक रस्सी से बंधी थी। उसने बिना एक पल गवांए उस बाल्टी को कुएं में फेंक दिया और अपने दोस्त को बोला इसे पकड़ लो । उसके दोस्त ने बाल्टी को पकड़ लिया और अंश अपनी पूरी ताकत लगा कर उसे खींचने लगा। खींचता रहा , खींचता रहा उसने अपनी पूरी जान लगा दी। और तब तक खींचा जब तक उसने अपने दोस्त की जान ना बचा ली । आखिरकार उस छोटे से 6 साल के बच्चे अंश ने अपने दोस्त ओम की जान बचा ली, दो...

! शायद !

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किसी  से अपने मन के सुख - दुख बांटना सही है या गलत ? कभी-कभी लगता है कि हम बहुत कमजोर हो जाते हैं तो अपनी भावनाएं , अपने भीतर छुपी बातें , अपनी खुशी या अपनी परेशानी किसी दूसरे इंसान से शेयर करते हैं ; लेकिन क्या वास्तव में हम कमजोर होते हैं? या यह हमारा उस दूसरे इंसान पर विश्वास होता है, जो हम उससे अपनी भावनाएं शेयर कर देते हैं ।  यह सवाल मेरे मन में उलझ गया है । आज के दौर में क्या कोई साफ दिल का इंसान मिलना मुमकिन है? समझ नहीं आता कि बात हंसने की है या परेशान होने की। आज के दौर में जिंदगी इतनी उलझी हुई है कि अब सुलझ नहीं सकती।  तो क्यों न इस उलझन के उलझे हुए होने का भी मजा लिया जाए। उसे यूं ही छोड़ दिया जाए। कुछ बातें आधी अधूरी ही मजा देती हैं। बिजी रहता है मन , एक्साइटमेंट बना रहता है ; कि आगे क्या होता है? या क्या होने वाला था? क्या हो सकता था? अगर लाइफ में कुछ पुरा नहीं हो रहा तो ना होने दो। जो अधुरे पन्ने हैं जिंदगी की किताब के उन्हें पूरे करने की कोशिश ही मत करो । शायद जिंदगी में कोई एक्साइटमेंट आ जाए ? !शायद!

कभी-कभी कुछ ना करना भी अच्छा होता है।

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☘कभी-कभी कुछ ना करना भी अच्छा होता है।☘ आजकल टीवी पर एक प्रचार आया हुआ है; एक चॉकलेट कंपनी का, इसमें वह दिखाता है कि एक लड़का जो कि चॉकलेट खाते में इतना खो जाता है; कि उसके बगल में एक बूढ़ी महिला बैठी होती है;  उसकी छड़ी सामने सड़क पर गिर जाती है और जब वह चॉकलेट खाते हुए लड़के से कहती है कि बेटा मेरी छड़ी उठा दो तो लड़का चॉकलेट खाने में इतना मग्न रहता है कि वह उसकी बात को ध्यान नहीं दे पाता और अनसुना कर देता है। अंत में वह हार कर वह महिला खुद ही छडी उठाने के लिए आगे बढ़ती है तभी  ऊपर से कोई भारी चीज उसके बैठे हुए जगह पर गिर जाती है । इस प्रचार से यही देखने को मिला कि लड़का के कुछ ना करने से उस बूढ़ी महिला की जान बच गई । यह तो रही प्रचार की बात। अब आपको इसी पर एक कहानी सुनाता हूं ।यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो हर प्रकार के ताले को खोलने में माहिर था। चाहे वह जेल का ताला हो , तिजोरी का ताला हो , घर का ताला हो या किसी भी तरह का ताला वह कुछ सेकंड्स में ही खोल देता था । लोग हैरान हो जाते थे उसकी इस कला को देख कर। एक दिन एक चैलेंज रखा जाता है कि उसे...

वाह ! कोरोना ! वाह !

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🔆वाह ! कोरोना ! वाह ! 🔆 वाह ! कोरोना ! वाह ! , तु इत्तु सा से भी छोटा है, मगर तुने पुरी दुनिया के नाक में दम कर रखा है । बहुत ताकतवर देश जैसे इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, स्पेन और अमेरिका, कनाडा आदि को भी तुने घुटने के बल पर ला दिया है । भारत में भी लॉकडाउन के दो-तीन दिनों बाद तक लगने लगा कि हमलोग तो तुझे अपने देश से भगा हीं देंगे ; लेकिन तु नहीं भागा । उसके बाद आया लॉकडाउन का एडवांस वर्जन लाॅकडाउन 2.0 ; मुझे लगता था की नया वर्जन पुराने से बेहतर होता है  खैर  तुने यहाँ भी अपनी जड़े जमा हीं ली। मुझे तो यह समझ नहीं आता कि तू चाइना का होकर भी इतने दिन कैसे टिक गया । तुम्हारी गति कम करने के लिए लॉकडाउन 3.0 लाया गया । इसमें कहा गया कि जरूरी चीजें खुलेंगी; स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे । और हम अबतक समझते रहें कि पढ़ाई ज्यादा जरूरी है । लेकिन जरूरी तो शराब है । तेरी वजह से आज विश्व आर्थिक मंदी की दहलीज पर है और अभी तो हमलोग आने वाले समय में अगर कोरोना से बच गये तो और भी भयावह आर्थिक मंदी देखेंगे । तेरी (कोरोना) वजह से लगाया गया लॉकडाउन डिप्रेशन, आत्महत्य...

जीवन में अपेक्षा

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☘जीवन में अपेक्षा☘   इंसान कभी भी इस संसार से भौतिक जगत की संपत्ति लेकर अपने साथ नहीं जाता अगर वह कुछ लेकर जाता है तो अपने अंदर समेटे हुऐ ज्ञान को । तो कहने का अर्थ यह है कि; जो हम अपने साथ लेकर नहीं जा सकते  उसी के पीछे सबसे ज्यादा पड़े हुए हैं । अब मेरे कहने का यह बिल्कुल मतलब आप न निकाले कि मैं कोई मोक्ष का मार्ग बतलाने वाला हूं ऐसा नहीं है। मैं तो बस इतना कहना चाहता हूं कि जो हमारा नहीं है उसी को हम लेना चाहते हैं, ज्यादा से ज्यादा जमा करना चाहते हैं और जो हमारा अपना है , जो हमारे साथ जाएगा वह हम लेने को तैयार नहीं है । शायद इसीलिए हम कहीं ना कहीं दुखी भी हैं इन सभी दुखों का कारण है अपेक्षा।   आज के बदलते परिवेश ने शायद हर चीज के मायने बदल दिए हैं। यहां तक कि रिश्तो में भावनाओं का चलन भी एक हाथ दे और एक हाथ ले हो गया है। व्यक्ति को किसी भी रिश्ते में अपेक्षा उतनी ही रखनी चाहिए जितनी पूरी हो सके। अपेक्षा कभी भी ड्रीम सिचुएशन वाली नहीं होनी चाहिए। हम अगर वास्तविकता को ध्यान में रख कर किसी बात को सोचें तो कभी भी निराशा नहीं होगी। अपेक्षा में कोई वास्तविकता नही...