कभी-कभी कुछ ना करना भी अच्छा होता है।
☘कभी-कभी कुछ ना करना भी अच्छा होता है।☘
अब आपको इसी पर एक कहानी सुनाता हूं ।यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो हर प्रकार के ताले को खोलने में माहिर था। चाहे वह जेल का ताला हो , तिजोरी का ताला हो , घर का ताला हो या किसी भी तरह का ताला वह कुछ सेकंड्स में ही खोल देता था । लोग हैरान हो जाते थे उसकी इस कला को देख कर। एक दिन एक चैलेंज रखा जाता है कि उसे व्यक्ति को चेंबर में बंद करके एक स्विमिंग पूल के अंदर डाला जाएगा । चेंबर जो है पानी के अंदर होगी और उसे सांस रोककर उसे चेंबर के ताले को खोलना होगा । अगर वह ताला खोल पाया तो वह बाहर आ जाएगा और अगर नहीं खोल पाया तो वह अपनी हार स्वीकार कर लेगा और चेंबर के अंदर एक इमरजेंसी घंटी बजा देगा । जिससे यह पता चल जाएगा कि उससे ताला नहीं खुलेगा और वह अपनी हार मान चुका है ।
उसने यह चैलेंज है स्वीकार कर लिया ; उसे पूरी तरह विश्वास था कि वह यह काम कर सकता है । बहुत सारे लोग इकट्ठे हुए उस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए। व्यक्ति को चेंबर में डाला गया और धीरे-धीरे करके चेंबर को पानी में उतार दिया गया । लोग एक्साइटेड है यह देखने के लिए कि वह किस तरह से इस काम को कर पाता है । उस व्यक्ति ने अपनी जेब से एक तार निकाला और ताले को खोलना शुरू किया। सेकंड दर सेकंड बितते जा रहे थे। एक - एक सेकंड उस व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा था सांस रोककर उस काम को करना। लोग हैरान थे कि जो कुछ सेकेंड में ही हर लॉक को खोल देता है। वह इस बार इतना समय क्यों ले रहा है ? जैसे - जैसे समय बीत रहा था है उसके लिए पानी में रहना और मुश्किल होता जा रहा था। उस व्यक्ति ने अपना सारा जोर लगा दिया , सारे तरीके आजमा लिये ; लेकिन वह लॉक नहीं खुल पाया। अंत में उसने अपनी हार मानना ही सही समझा और उसने वह रिंग बजा दी कि मैं अब हर मानता हूं , मैं यह ताला नहीं खोल सकता। जैसे ही उसने वह इमरजेंसी रिंग बजाई चेंबर धीरे-धीरे पानी से ऊपर आने लगा । वह व्यक्ति हर चुका था उसे बहुत बुरा लग रहा था । वह लोगों से नज़रें नहीं मिला पा रहा था इसी क्रम में वह जब चेंबर के गेट को पकड़कर नीचे बैठने की कोशिश करता है तो चेंबर का गेट एक साइड से अपने आप खुल जाता है । तब उसे पता चलता है कि गेट लॉक था ही नहीं। उसने सोचा कि यह बात मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आई की गेट लॉक ही ना किया गया हो।
जब समाधान बहुत आसान होता है तो आप कितने भी टैलेंटेड क्यों ना हो आपका टैलेंट कभी काम नहीं आएगा। अगर आपको ठहर कर सोचना नहीं आता । कई बार कुछ नहीं करना ही समाधान होता है। कई बार यह देख लेना भी समाधान होता है की प्रॉब्लम उतनी बड़ी है भी या नहीं। हम अपनी आसपास के लोगों से या किताबों में पढ़ते आ रहे हैं कि, अपने आपको व्यस्त रखा करो । यह आजकल ट्रेंड हो चुका है कि मैं बहुत बिजी हूं । बिजी होना लोगों के लिए स्वैग हो चुका है। लेकिन some times it's ok to do nothing . कुछ भी ना करना कई बार सही होता है। क्योंकि जब कई बार कुछ नहीं कर रहे होते उस वक्त ऐसे विचार आते हैं जो बिजी रहते वक्त नहीं आ सकते।
ताजा उदाहरण में अपने आपको भी शामिल कर सकता हूं क्योंकि जब मैं कुछ नहीं कर रहा था तभी मुझे यह ब्लॉग लिखने का आईडिया आया।( jokes apart )
वह व्यक्ति चेंबर के लॉक को खोलने में, लोगों को इंप्रेस करने में, खुद को अच्छा साबित करने में , लॉक कैसे खोलूंगा इन सब में बहुत व्यस्त हो गया था । जिसके वजह से उसके दिमाग में एक पल के लिए भी नहीं आया कि हो सकता है कि चेंबर का गेट लॉक हो भी ना।
इसी तरह से हम अपनी जिंदगी भी जी रहे हैं तभी समाधान भी नहीं मिल रहा है; क्योंकि हम ठहर कर सोच नहीं रहे हैं हम कुछ नहीं करने वाले जोन में कभी नहीं आते। हम हमेशा अपने आपको बिजी रखना चाहते हैं। लेकिन सच तो यह है कि जो कुछ नहीं कर रहे होते वही कभी-कभी कमाल कर जाते हैं।
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